ईरान के लिए सलाह- खुद को विजेता घोषित करो, सीजफायर का ऐलान करो

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

मिडिल ईस्ट की आग अब और भड़क सकती है। Donald Trump जहां जंग को जमीन तक ले जाने की तैयारी में हैं, वहीं Javad Zarif ने ऐसा सुझाव दिया है, जो पूरी रणनीति बदल सकता है। सवाल ये है—क्या अब युद्ध थमेगा या और खतरनाक मोड़ लेगा?

35वें दिन भी जारी जंग

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब 35वें दिन में प्रवेश कर चुका है। हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं और किसी ठोस समाधान के संकेत नजर नहीं आ रहे।

जरीफ की सलाह: “खुद को विजेता घोषित करो”

ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने बड़ा बयान दिया है उन्होंने कहा, ईरान को खुद को विजेता घोषित करना चाहिए। इसके बाद सीजफायर का ऐलान करना चाहिए। अमेरिका के साथ एक स्थायी समझौता करना चाहिए।

उनका मानना है कि इससे जंग खत्म हो सकती है और भविष्य के टकराव भी टाले जा सकते हैं।

हॉर्मुज स्ट्रेट पर डील का सुझाव

Strait of Hormuz को लेकर भी जरीफ ने अहम बात कही ईरान हॉर्मुज को खोलने का प्रस्ताव दे। बदले में अमेरिका से प्रतिबंध हटवाए। आर्थिक दबाव को कम करे। यह कदम वैश्विक तेल सप्लाई पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

ट्रंप की तैयारी: ग्राउंड ऑपरेशन

दूसरी ओर, Donald Trump जंग को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ग्राउंड ऑपरेशन की योजना बना रहा है। लक्ष्य: यूरेनियम संसाधनों पर नियंत्रण। हजारों कमांडो की जरूरत पड़ सकती है। जमीन पर एयरस्ट्रिप बनानी होगी। यह ऑपरेशन हफ्तों तक चल सकता है और बेहद जटिल माना जा रहा है।

चुनौती: जमीन के नीचे यूरेनियम

सबसे बड़ी चुनौती है  जमीन के नीचे छिपे यूरेनियम को निकालना। भारी उपकरणों की तैनाती। सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित करना। यानी यह सिर्फ सैन्य नहीं, तकनीकी और रणनीतिक लड़ाई भी है।

वैश्विक असर बढ़ने का खतरा

अगर ग्राउंड ऑपरेशन शुरू होता है, तो इसके असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेंगे।

  1. तेल की कीमतों में उछाल
  2. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
  3. अन्य देशों की संभावित भागीदारी

यह संघर्ष एक बड़े युद्ध में बदल सकता है।

क्या ईरान जरीफ की सलाह मानेगा? या ट्रंप का ग्राउंड ऑपरेशन जंग को और भड़का देगा? एक तरफ कूटनीति का रास्ता, दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी— अमेरिका-ईरान संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। दुनिया की नजर इस पर है कि क्या शांति जीतेगी या युद्ध का दायरा और बढ़ेगा?

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